जाने बच्चों के लिए कितना हानिकारक है पाम ऑयल

जाने बच्चों के लिए कितना हानिकारक है पाम ऑयल



प्रायः देखा गया है कि 50 वर्ष से कम उम्र के लोगों में भी आज के समय में ह्रदय घाट हार्ट अटैक की बीमारी होने लगी है जबकि इस उम्र में आदमी चुस्त-दुरुस्त रहता है और हृदय घाट घाट घाट घाट की संभावनाएं कम ही होती हैं लेकिन अब यह काफी कम उम्र में भी होने लगा है। इएमआरआई रिपोर्ट्स के अनुसार  हृदयाघात से  पीड़ित अधिकांश लोग  50 वर्ष से कम उम्र के होने लगे हैं । 50 वर्ष से कम उम्र के लोगों में हृदयाघात होने का एट बड़ा कारण है पाम आयल।
आपको यह जानकर आश्चर्य होगा की पायल हृदयाघात में वास्तविक अपराधी है अल्कोहल और धूम्रपान जैसी चीजों से होने वाले कुल नुकसान से से कहीं अधिक नुकसान पहुंचाता है।
यह जानना भी महत्वपूर्ण है कि भारत विश्व में पाम ऑयल का सबसे बड़ा आयातक देश है। यहां पाम आयल का माफिया आयल का माफिया का माफिया माफिया बहुत बड़ा है और शक्तिशाली है जिसके कारण इस देश के युवा एवं बच्चे और उनका फ्यूचर खतरे में है।
देश में कोई भी ऐसा फास्ट फूड या बेकरी या बेकरी फूड या बेकरी या बेकरी आइटम ऐसा नहीं है जिसमें पाम ऑयल का उपयोग न होता हो। जब आप किसी ग्रॉसरी के स्टोर में जाए तो बच्चों के खाने का सामान जैसे बिस्कुट चॉकलेट आदि उठा कर देखिए और उसमें कंटेंट्स कंटेंट्स और उसमें कंटेंट्स कंटेंट्स की लिस्ट को यदि आप देखते हैं तो उसमें पाम आयल का शामिल होना भी आपको मिल जाएगा। बच्चों के स्वास्थ्य के लिए यह बेहतर होगा कि ऐसे खाद्य पदार्थ ही खरीदे जाएं जिनमें पाम ऑयल शामिल ना हो हो।
 हमें यह बताया जाता है कि बच्चों के लिए चॉकलेट जैसी चीजें स्वास्थ्यवर्धक हैं हैं हैं लेकिन वास्तविकता को पर्दे के पीछे ही रखा जाता है और हम अपने खाद्य पदार्थों में उपयोग हो रही खतरनाक पाम ऑयल पामीटिक एसिड जैसी चीजों से अनजान ही रहते हैं।
आलू के चिप्स "लेज" बनाने वाली वह अन्य बड़ी कंपनियां पश्चिमी देशों में अलग तेल का उपयोग करते हैं जबकि भारत में वे पाम ऑयल का उपयोग पाम ऑयल का उपयोग करते हैं इसका एकमात्र कारण है पाम ऑयल का सस्ता होना। इस बात से सोते हैं स्पष्ट हो जाता है कि हो जाता है कि विदेशी खाद्य निर्मात्री कंपनियां भारत के लोगों की सेहत के लिए कितनी सजग हैं।
प्रत्येक बार जब भी बच्चे पाम ऑयल ऑयल से बनी चीजों को खाते हैं तो उनका मस्तिष्क एक अलग तरह की प्रतिक्रिया देता है और धमनियों को फैट हृदय तक पहुंचाने के निर्देश देता है जिससे युवावस्था में ही डायबिटीज जैसी बीमारी  हो सकती है।
वर्ड इकोनॉमिक फोरम के अनुसार  युवावस्था में मरने वाले लोगों में से लगभग आधे डायबिटीज या हृदयाघात के ग्रसित होते हैं।
 दरअसल पाम ऑयल माफिया ने बच्चों को जंक फूड का एडिक्ट बना दिया है। जिससे ह्रदय को संरक्षित रखने वाले फल और सब्जियों से बच्चों ने किनारा कर दिया है।
बच्चों के भविष्य को देखते हुए हमें चाहिए कि अगली बार जब भी हम ही बच्चों के लिए कुछ खाद्य पदार्थ खरीदने जाएं तो यह सुनिश्चित करें कि उसमें पाम ऑयल, पामीटिक एसिड या पामोलिनिक आयल जैसी चीजों का सम्मिश्रण न हो। यदि ऐसा हो तो उन वस्तुओं को कदापि ना खरीदा जाए ना खरीदा जाए।
देश और देश के नौनिहालों के भविष्य को देखते हुए हमें सभी को सजग रहना चाहिए और संबंधित अधिकारियों और देश के प्रधानमंत्री जी से यह आग्रह करना चाहिए कि देश में पाम ऑयल का उपयोग नए हो सके हो सके।
पाम ऑयल के घातक एवं प्राण लेवा उपयोग के बारे में हमें जन-जन में जागृति उत्पन्न करनी चाहिए ताकि चाहिए ताकि हमारे सभी के बच्चे स्वस्थ रह सकें।
डा. भावना, बालरोग विशेषज्ञ (सर्जन), पीजीआई।


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