घंटाघर की पार्किंग का उद्देश्य लोगों की सुविधा अथवा वसूली

  घंटाघर की पार्किंग का उद्देश्य लोगों की सुविधा अथवा वसूली



देहरादून। देहरादून की सड़कों पर आए दिन लगने वाले जाम और अतिक्रमण से देहरादून की जनता अक्सर त्रस्त रही है। एक नाम है जो आज देहरादून की आम जनता की जबान पर चढ़ा हुआ है, वह है वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अरुण मोहन जोशी का नाम। जिन्होंने पलटन बाजार और उसके आसपास की गलियां, जो अतिक्रमण से बे-तरह ग्रस्त थी उन्हें अतिक्रमण मुक्त कराकर बाजार को चौड़ा और आवागमन के लिए सुविधाजनक बना दिया है जिसके लिए जनता ने उनका आभार व्यक्त किया है। लोगों का मानना है कि प्रशासन अगर चाहे तो सभी व्यवस्थाएं चुस्त-दुरुस्त हो सकती हैं।


दूसरी तरफ शहर के बीचोबीच मुख्य डाकघर के सामने घंटाघर क्षेत्र में पुलिस ने पिछले काफी समय से पार्किंग के नाम पर सड़क का स्वयं अतिक्रमण किया हुआ है।


ज्ञात हो कि घंटा घर से निकलते हुए राजपुर रोड शहर की सबसे व्यस्ततम सड़क है यहां हर मिनट में सैकड़ों वाहन गुजरते हैं इसके अलावा पैदल चलने वाले लोग भी बड़ी संख्या में गुजरते हैं। दुपहिया वाहन से चलने वालों को तो यहां जगह ही नहीं मिलती की वे पोस्ट ऑफिस के पास अथवा सामने की दुकानों पर रुक कर अपने जरूरी काम निपटा सकें।


घंटाघर से सटे इस पार्किंग में मुख्य रूप से बड़ी कारों के लिए जगह बनाई गई है जिसके लिए बाकायदा पेंट करके और पार्किंग स्टाफ की नियुक्ति करके कारों की पार्किंग कराई जाती है और कारों से अच्छा खासा राशि वसूल की जाती है जबकि यह जगह छोटे वाहनों और पैदल चलने वालों के लिए मुफीद और उपयोगी हो सकती है। नियंता सड़क के किनारे फुटपाथ का बनाया जाना भी अनिवार्य होता है, लेकिन ऊंची कुर्सी पर बैठे हुए लोगों को सड़क पर चलने वाले लोग, पैदल चलने वाले लोग, साइकिल से चलने वाले लोग शायद दिखाई ही नहीं देते इसलिए मुख्य मार्ग के किनारे को पुलिस प्रशासन ने स्वयं अतिक्रमित किया हुआ है।


कहने को तो इसे पार्किंग के लिए की गई व्यवस्था बताया जा सकता है साथ ही इसके पीछे राजस्व का मुद्दा भी हो सकता है लेकिन सड़क पर सबसे जरूरी है कि पैदल चलने वालों को सुरक्षित स्थान मिल सके जो इस पार्किंग की वजह से उपलब्ध नहीं हो पा रहा है जहां तक पार्किंग से मिलने वाले राजस्व का सवाल है तो वह राजस्व नहीं कहला सकता क्योंकि पुलिस सीपीयू के मामले में भी संग्रहित की गई धनराशि को राजकोष में जमा नहीं करती है। इसलिए ऐसा संग्रह जो राजकोष का भाग न हो राजस्व नहीं कहला सकता।


 जिला प्रशासन एवं पुलिस प्रशासन से लोगों की अपेक्षा है कि वे पार्किंग फीस के चक्कर में ना पड़कर लोगों के सुगम व सुरक्षित आवागमन के लिए उपयुक्त व्यवस्था करें।