आराकोट आपदा: जाको राखे साइयां मार सके ना कोय

 आराकोट आपदा: "जाको राखे साइयां मार सके ना कोय"



देहरादून। भारी बारिश के चलते उत्तराखंड के अनेकों पहाड़ी स्थल आपदा की चपेट में हैं जहां भारी जान और माल का नुकसान हुआ है। अनेकों लोगों की बारिश और मलबे की चपेट में आने से मौत हुई है वहीं अनगिनत लोग मलबे और पानी के साथ बह गए हैं या दब गए हैं जिनका कुछ पता नहीं चल रहा है। केंद्र व राज्य सरकारें हर संभव प्रयास कर रही हैं आपदा पीड़ितों को राहत पहुंचाने के लिए।


 वहीं दूसरी ओर ऐसा भी मंज़र सामने आता है जब कहा जा सकता है जाको राखे साइयां मार सके ना कोय। उत्तरकाशी के आराकोट क्षेत्र में ऐसा ही कुछ वाकया सामने आया है। बादल फटने से आए सैलाब में जहां इस क्षेत्र में सब कुछ तहस-नहस कर दिया था वही 11वीं की एक छात्रा आंचल पुत्री मोहनलाल और एक महिला राधा देवी की जान भी इसी सैलाब ने बचाई।  बताया जा रहा है कि आंचल और राधा देवी बारिश के साथ आए सैलाब में मलबे में दब गई थी लेकिन जैसे ही दोबारा सैलाब आया मलबे और पानी ने दोनों को सुरक्षित स्थान पर धकेल दिया। जहां से उन्हें रेस्क्यू कर देहरादून के दून अस्पताल में लाया गया और उनकी जान बच सकी। राधा देवी घर में अकेली रहती हैं उनके पति ज्ञानसू में पशुपालन विकास में हैं बेटी अनीता और बेटा उमेश ज्ञानसू में ही रहते हैं। उनके अनुसार वह रविवार सुबह अपनी बड़ी बेटी को फोन करके उसे घर आने को कह रही थी फोन पर बात करने के दौरान ही जोरदार धमाका हुआ और वह मलबे में फंस गई छटपटाते हुए उसने मलबे से निकलने का प्रयास किया लेकिन कामयाब नहीं हो सकी। करीब 3 मिनट तक तो  उन्होंने अपनी जिंदगी की जंग जारी रखी। जिंदा रहने की उम्मीद छोड़ दी थी तभी अचानक पीछे से एक और सैलाब आया जिसके बहाव से वह एक ऐसी जगह आ गई जहां पानी नहीं था और बच गई। राधा देवी कहती हैं कि कुल देवता की कृपा से उनकी जान बच गई। दूसरी तरफ दून अस्पताल में भर्ती आराकोट और निवासी सोहनलाल ने बताया कि मोहन लाल की 11वीं में पढ़ने वाली बेटी आंचल सैलाब की चपेट में आए मलबे में फंस गई थी। 25 मिनट बाद दोबारा सैलाब आया। जिसने घर के मलबे में फंसी आंचल को पानी के तेज बहाव में ऊपर उछाला और और वह सुरक्षित स्थान पर आ गई। उसके चेहरे और हाथों पर हल्की चोट आई हैं।


 दोनों बातें बताती हैं कि भगवान ने जिनको जिंदगी दी है उनकी जिंदगी कोई नहीं छीन सकता। जब तक जीवन है उसे जीना ही है हालात चाहे जैसे भी हों। तभी तो कहा गया है "जाको राखे साइयां मार सके ना कोय।"


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