विलुप्ति के कगार पर है फीया, हिमालयन (मरमोट), वन विभाग है बेखबर

विलुप्ति के कगार पर है फीया हिमालयन (मरमोट), वन विभाग है बेखबर



पिथौरागढ़। फीया के नाम से जाना जाने वाला उच्च हिमालय, तिब्बत के पठारों में पाए जाने वाले हिमालयन मरमोट को स्थानीय लोग पवित्र मानते हैं। कहा जाता है कि फिया अपने दोनों पैरों पर खड़ा होकर दोनों हाथों को नमस्कार की मुद्रा में जोड़ते हुए   हिमालय  का अभिवादन करता है। सम्भवत: इसलिए इसे पवित्र माना जाता है। शिकारियों की हर पल इस पर नज़र रहने से इसका जीवन संकट में है और इनकी कई प्रजातियां विलुप्त हो चुकी हैं। मरमोट आमतौर से 10000 फीट से अधिक ऊंचाई पर पाए जाते हैं। यह जीव जमीन के नीचे गड्ढे बनाकर रहता है इसलिए इन्हें ढूंढ पाना बेहद कठिन है, लेकिन शिकारियों के चुंगल से यह फिर भी बच नहीं पाते। पिथौरागढ़ की ब्यास घाटी में इनके शिकार की की चर्चा अक्सर सुनी जाती है है जाती है।
स्थानीय जनता इस विलुप्त होती और पवित्र माने जाने वाली प्रजाति के अस्तित्व और सुरक्षा के लिए बहुत चिंतित दिखाई देती है। लोगों का मानना है कि शिकारी अक्सर जिले के बाहर से ही आते हैं और वह आग और धुआं के प्रयोग से फीया ( हिमालयन मरमोट) का  शिकार करते हैं। शिकारी उनके धरती के नीचे बने हुए बसेरे से बाहर निकलने का रास्ता बंद कर देते हैं तथा आग और धुएं से  मरमोट का दम घुटने लगता है जिससे मरमोटों की मृत्यु हो जाती है।


पिथौरागढ़ वन विभाग के अधिकारी विनय भार्गव के अनुसार वन विभाग को बाहरी व्यक्तियों द्वारा  मरमोट के शिकार करने की जानकारी नहीं है। हिमालय क्षेत्र में आमतौर से आइटीबीपी द्वारा सुरक्षा कार्य किया जाता है और हां हम इस विषय में उनसे जानकारी प्राप्त करेंगे।
अब प्रश्न यह उठता है कि क्षेत्र भले ही आइटीबीपी द्वारा संरक्षित हो लेकिन वन्यजीवों के संरक्षण के लिए कौन उत्तरदाई है और यह भी कि यदि वन्यजीवों के संरक्षण के लिए नियुक्त किए गए वन विभाग के अधिकारी यदि अपने कर्तव्य का पालन नहीं करेंगे तो अन्य विभागों से उनके दायित्व का पालन करने के लिए कैसे अपेक्षा की जा सकती है।


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